पर्यावरण खाद्य श्रंखला
खाद्य श्रंखला या खाद्य कड़ी.....
खाद्य श्रंखला विभिन्न जीवो का वह कम्र है जिसके द्वारा एक पारितंत्र में ऊर्जा का प्रवाह होता है ।
खाद्य श्रंखला में ऊर्जा का प्रवाह एक दिशीय होता है। जैसे- पौधे-टिड्डा-मेंढक-सांप ।उपरोक्त उदाहरण में पौधे भोजन का निर्माण करते हैं और टिड्डा उनसे खाद्य ऊर्जा प्राप्त करता है। टिड्डा मेंढक को खाद्य्य ऊर्जा प्रदान करता है
एवं सांप मेंढक से खाद्य उर्जा प्राप्त करता है।
इस तरह खाद्य श्रंखला ज्यादा से ज्यादा 5 स्तर की हो सकती है क्योंकि प्रत्येक स्तर पर उपभोक्ता केवल 10% संचित ऊर्जा ही अपने शरीर में रूपांतरित करता है बाकी 90% ऊर्जा की हानि होती है।
उपभोक्ता द्वारा 10% संचित ऊर्जा के रूपांतर को लिंडमैन का 10% का सिद्धांत कहा जाता है एवं पर्यावरण में ऊर्जा का मुख्य स्रोत सूर्य है।
सूर्य (10,000) - उत्पादक(100) - प्राथमिक उपभोक्ता (10) - द्वितीयक उपभोक्ता(1) - तृतीयक उपभोक्ता(0.1)
किसी भी पारितंत्र में मूल उत्पादकों में अत्यधिक ऊर्जा मिलेगी और सर्वश्रेष्ठ श्रेणी के उपभोक्ता में सबसे कम ऊर्जा मिलेगी इसी कारण ऊर्जा का पिरामिड हमेशा सीधा बनता है।
ऊर्जा का पिरामिड
खाद्य श्रंखला के स्तर
१. द्विस्तरीय
उदाहरण: पौधे-हाथी
२. त्रिस्तरीय
उदाहरण: पौधे-हिरण-बाघ
३. चतुर्थ स्तरीय
उदाहरण: पौधे-खरगोश-लोमड़ी-बाघ
४. पंच स्तरीय
उदाहरण : पौधे- टिड्डा- मेंढक- सांप-मोर
खाद्य श्रंखला द्वारा घातक रसायनों की बढ़ती मात्रा को जैव सांद्रण कहते हैं।
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