इतिहास के सभी महत्वपूर्ण तथ्य....

इतिहास व इसकी वस्तुनिष्ठता क्या है ....

इतिहास हमें अतीत में घटित घटनाओं के विषय में जानकारी देता है परंतु भूतकाल में घटित हुई सभी घटनाएं सत्य हैं या वह घटनाएं निश्चित ही हुई है इसका तर्क है कि इतिहास का अध्ययन स्रोतों एवं प्रमाणों के आधार पर किया जाता है व इनकी जानकारी किसी ने किसी स्रोतों जैसे - पुरातात्विक स्रोत, साहित्यिक स्रोत, व विदेशी विवरण  से मिलती है तभी यह घटना  इतिहास कहलाती है।
सर्वप्रथम यूनानी लेखक हेरोटोडस ने अपनी पुस्तक  हिस्टोरिका लिखकर अतीत में घटित घटनाओं के विषय में जानकारी दी इसीलिए हेरोटोडस को इतिहास  का पिता या जनक कहा जाता है। अंग्रेजी शब्द हिस्ट्री एक यूनानी शब्द हिस्टोरिया से बना है जिसका अर्थ है ज्ञान या जानकारी इसीलिए हेरोडोटस ने अपनी पुस्तक का नाम हिस्टोरिका रखा। इतिहास शब्द इति-ह-आस का संश्लिष्ट रूप है इसका अर्थ है निश्चित ही ऐसा हुुआ होगा।  
अतीत में घटित घटनाएं पूर्णता सत्य है अथवा नहीं इस विषय में विश्व इतिहास लेखक रेनियर का मत है की इतिहास पूर्णता सत्य नहीं है क्योंकि इतिहास विज्ञान नहीं हो सकता केवल  विज्ञान ही परफेक्ट जानकारी देता है क्योंकि
विज्ञान से जो जानकारी मिलती है वह जानकारी प्रयोगशाला से परीक्षण के बाद आती है  और इतिहास की जानकारी इतिहासकारों के दिमाग से होकर आती है अर्थात कोई भी इतिहासकार जब भी किसी घटना को लिखेगा तो उस पर उसकी विचारधारा अथवा व्याख्या करने के ‌ तरीके का प्रभाव अवश्य पड़ेगा इसका उदाहरण है चंद्रवरदाई , चंद्रवरदाई ने पृथ्वीराज रासो मैं अपने राजा (पृथ्वीराज चौहान) की पराजय को भी उसकी उपलब्धियों में बदला है , और गोरी को मारने का विवरण इस प्रकार दिया है -
 चार बॉस 24गज अंगुल अष्ट प्रमाण।
 ता ऊपर सुल्तान है जोक मत चौहान।
इसीलिए कहा जाता है इतिहास वस्तुनिष्ठ नहीं होता।यदि इतिहास पूर्णता पुरातात्विक स्रोतों के आधार पर लिखा जाए तब उसमें वस्तुनिष्ठता के अंश अधिक होते हैं क्योंकि पुरातात्विक स्रोतों में परिवर्तन करना कठिन होता है।
किसी भी घटना को ज्यों का त्यों लिखना ही इतिहास की वस्तुनिष्ठता कहलाती है परंतु घटना की व्याख्या में पडने वाला विचारधारा का प्रभाव या लेखक की भावना के प्रभाव पर वस्तुनिष्ठता का कोई प्रतिबंध नहीं होता।

इतिहास को जानने के स्रोत
१. पुरातात्विक स्रोत ‌‌‌‌‌‌‌‌- पुरातात्विक स्रोतों के अंतर्गत अवशेष अभिलेख स्मारक सिक्केे वह मोहरे आती हैं।
२.  साहित्यिक स्रोत - साहित्यिक स्रोत दो प्रकार के हैं  
क. धार्मिक  स्रोत - रामायण, महाभारत, वेद, ब्राह्मण‌ ग्रंथ, आरण्यक, वेदांग, सूत्र, महाकाव्यय, धर्मशास्त्रर, उपनिषद, जैन ग्रंंथ, बौद्ध ग्रंथ,आदि।
ख.  गैर धार्मिक स्रोत - चाणक्य का अर्थशास्त्र, मेगस्थनीज की इंडिका, पतंजलि का महाभाष्य, विष्णु शर्मा की पंचतंत्र, कालिदास का अभिज्ञान शाकुंतलम् आदि
३.  विदेशी यात्रियों का विवरण।

इतिहास की जानकारी इन्ही स्रोतों से प्राप्त होती है।

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